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बुध ने 18 जून को शत्रु नक्षत्र रोहिणी में किया प्रवेश !!
डॉ श्रद्धा सोनी, वैदिक ज्योत् आचार्य, रत्न विशेषज्ञ, वास्तु एक्सपर्ट
भारतीय ज्योतिष शास्त्र की बात करें तो उसमें कुल 27 नक्षत्रों का वर्णन किया गया है। जिसमें समस्त नक्षत्रों में से विशेष स्थान नक्षत्र चक्र के चौथे नक्षत्र ‘रोहिणी” को प्राप्त है। कई शास्त्रों में भी इस नक्षत्र को अधिक पूजनीय व वंदनीय बताया गया है। रोहिणी नक्षत्र की राशि वृषभ है, जो शुक्र ग्रह की राशि होती है। जबकि रोहिणी नक्षत्र के स्वामी ग्रह चन्द्रमा को माना जाता है।
बुद्धि के देवता बुध ग्रह की, जो 18 जून, को दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इस नक्षत्र में बुध ग्रह 28 जून की दोपहर 12 बजकर 26 मिनट तक रहेंगे। ऐसे में बुध का रोहिणी नक्षत्र में होना और इस नक्षत्र के विभिन्न चरणों में प्रवेश करना कई जातकों के लिए विशेष प्रभावी सिद्ध होगा।
ज्योतिषाचार्य के अनुसार बुध 18 जून से 28 जून तक रोहिणी नक्षत्र में रहेंगे।
राशि की बात करें तो बुध रोहिणी नक्षत्र में होते हुए वृषभ राशि में ही विराजमान होंगे।
ज्योतिष में रोहिणी नक्षत्र की राशि वृषभ को और रोहिणी नक्षत्र के ग्रह स्वामी चन्द्रमा को माना गया है।
जबकि वृषभ राशि के ग्रह स्वामी शुक्र देव होते हैं।
ग्रह मैत्री चक्र के अनुसार बुध और शुक्र मित्र ग्रह हैं, जबकि बुध का चन्द्रमा के साथ शत्रुता का भाव होता है।
बुध रोहिणी नक्षत्र फल
चूँकि बुध का चन्द्रमा के साथ पुत्र-पिता का रिश्ता होते हुए भी संबंध शत्रुता का होता है, इसलिए बुध का चन्द्रमा के नक्षत्र में आना जातकों के लिए कुछ चन्द्रमा से संबंधित फलों को प्रभावित करने का कार्य करेगा।
इससे चन्द्रमा और बुध सामान्य से कम शुभ फल देते हुए, जातकों को मानसिक तनाव और बेचैनी व स्वास्थ्य कष्ट देंगे।
हालांकि शुक्र एक शुभ ग्रह होने के चलते बुध और चन्द्रमा के बीच मध्यस्थता करेंगे और नकारात्मक परिणामों में कुछ सुधार भी लाएंगे।
शुक्र का ये प्रभाव उन सभी जातकों के लिए अनुकूल रहेगा जो संचार, विश्लेषण, विज्ञान, गणित, व्यापार, शिक्षा आदि के क्षेत्र से जुड़े हैं।
इसलिए खासतौर से इस नक्षत्र की महिलाएं किसी वस्तु के प्रति विशेष रुचि रखने वाली, मधुरभाषी व अपने कार्यक्षेत्र में व्यवस्थित रहने वाली होती हैं। हर नक्षत्र की तरह ही रोहिणी नक्षत्र के भी चार चरण होते हैं, जिसमें बुध एक-एक कर प्रवेश करते हुए अपना अलग-अलग प्रभाव दिखाएंगे।
बुध के रोहिणी नक्षत्र के सभी चार चरणों की समयावधि कुछ इस प्रकार है:-
बुध का रोहिणी में प्रथम चरण:
बुध रोहिणी के प्रथम चरण में 18 जून 2022 की दोपहर 12 बजकर 29 मिनट से लेकर 21 जून 2022 की सुबह 11 बजकर 16 मिनट तक रहेंगे। रोहिणी नक्षत्र के पहले चरण के स्वामी ग्रह मंगल होते हैं। ऐसे में रोहिणी नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा और रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण के स्वामी मंगल के बीच मित्रता होने के कारण, मेष, कर्क और वृश्चिक राशि के जातकों को इस दौरान धन, मान-सम्मान, सुख-समृद्धि, इच्छापूर्ति व उन्नति मिलने के योग बनेंगे।
बुध का रोहिणी में द्वितीय चरण:
बुध रोहिणी के द्वितीय यानी दूसरे चरण में 21 जून 2022 की सुबह 11 बजकर 17 मिनट से लेकर 23 जून की देर रात्रि 1 बजकर 12 मिनट तक रहेंगे। इस चरण के स्वामी ग्रह शुक्र होते हैं। ऐसे में रोहिणी नक्षत्र के दूसरे चरण में जन्में जातक सुन्दर, आकर्षक, मनमोहक, लोकप्रिय और सौम्य स्वभाव के होंगे। साथ ही शुक्र और चन्द्रमा के बीच अच्छी मित्रता भी होती है, जिसके परिणामस्वरूप इस दौरान सबसे अधिक वृषभ, तुला और कर्क राशि के जातकों को किसी महिला साथी व जीवनसाथी से अच्छा मुनाफ़ा मिलने के योग बनेंगे। हालांकि चन्द्रमा का बुध से शत्रु स्वभाव होने के कारण, कुछ जातकों को मानसिक पीड़ा भी संभव है।
बुध का रोहिणी में तृतीय चरण:
बुध रोहिणी के तृतीय यानी तीसरे चरण में 23 जून की देर रात्रि 1 बजकर 13 मिनट से लेकर 26 जून की सुबह 09 बजकर 03 मिनट तक रहेंगे। ऐसे में रोहिणी नक्षत्र के इस चरण में जन्मा जातक हर कार्य के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने वाला, सत्यवादी, नैतिकवादी, आर्थिक रूप से सशक्त व गायन, नृत्य आदि जैसे कला के क्षेत्रों में भी प्रतिभाशाली व उच्च स्थान प्राप्त करने वाला होता है। इसके अलावा ज्योतिष में रोहिणी नक्षत्र के तृतीय चरण के स्वामी बुध होते हैं और चन्द्र व बुध के बीच शत्रुता होने के कारण इस चरण के दौरान विशेषरूप से मिथुन, कर्क और कन्या राशि के जातकों को शिक्षा और स्वास्थ्य जीवन में थोड़ा सावधान रहने की सलाह दी जाती है।
बुध का रोहिणी में चतुर्थ चरण:
बुध रोहिणी के चतुर्थ यानी चौथे चरण में 26 जून की सुबह 09 बजकर 04 मिनट से लेकर 28 जून की दोपहर 12 बजकर 26 मिनट तक रहेंगे। ये रोहिणी नक्षत्र का अंतिम चरण होता है और इस चरण में जन्मे जातक तेजस्वी, सत्य बोलने वाले, अच्छे प्रेमी, शांतिप्रिय व जल या तरल पदार्थ से संबंधित व्यवसाय करने वाले होते हैं। इसके अलावा वैदिक ज्योतिष में रोहिणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण के स्वामी चन्द्रमा को माना जाता है और रोहिणी नक्षत्र के भी स्वामी स्वयं चन्द्रमा ही होते हैं। इसलिए ये चरण सबसे अधिक वृषभ और कर्क राशि वाले जातकों के लिए अनुकूलता लेकर आएगा। इस दौरान इन दोनों राशियों के जातकों को भरपूर सुख व समृद्धि प्राप्त होने के योग बनेंगे।
रोहिणी नक्षत्र का वैदिक मंत्र कुछ इस प्रकार है-
ब्रह्मजज्ञानं प्रथमं पुरस्ताद्विसीमत: सुरुचोव्वेनआव: सबुघ्न्या उपमा
अस्य विष्ठा: सतश्चयोनिमसतश्चत्विव: ब्रह्मणे नम:।।
बुध ग्रह का वैदिक मंत्र कुछ इस प्रकार है-
ऊँ उद्बुध्यस्वाग्ने प्रतिजागृहि त्वमिष्टापूर्ते स सृजेथामयं च
अस्मिन्त्सधस्थे अध्युत्तरस्मिन्विश्वे देवा यजमानश्च सीदत ।।


